Avlokan Discourses of Shri Devchand bhai Shah The book Search Photographs About

Shri Dravya Drushti Prakash

9 February 2002 · Patra 22

Transcript

Transcribed automatically and lightly corrected. The recording is the authority where they differ.

Recitations restored to their canonical wording: Mangalacharan — Mangalam Bhagavan Viro, Mangalacharan — Sarva Mangala Mangalyam.

0:12णमो अरिहंताणं

0:14णमो सिद्धाणं

0:16णमो आयरियाणं

0:18णमो उवज्झायाणं

0:20णमो लोए सव्व साहूणं

0:22नमः समयसाराय स्वानुभूत्या चकासते ।

0:28चित्स्वभावाय भावाय सर्वभावान्तरच्छिदे

0:32मंगलं भगवान वीरो, मंगलं गौतमो गणी।

0:38मंगलं कुन्दकुन्दार्यो, जैनधर्मोऽस्तु मंगलम्॥

0:44सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं सर्वकल्याणकारकम।

0:48प्रधानं सर्वधर्माणां जैनं जयति शासनम॥

0:52ॐकारबिन्दुसंयुक्तं नित्यं ध्यायन्ति योगिनः।

0:58कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नमः

1:29આત્માની તરફ પ્રગતિ કરે છે.

1:32તેમાં થોડી વાત ચાલી છે, હવે કહે છે કે,

1:37જે સમયે પહેલી વાર અનુભવ થાય છે,

1:40તે સમયે શ્રદ્ધા, જ્ઞાન અને આસ્થા ત્રણેય એક સાથે રહે છે,

1:46ઉસી પ્રકાર બીજી વાર, ત્રીજી વાર...

1:50दूसरी बार तीसरी बार चौथी बार भी अनुभव होता है तो उसी प्रकार से होता है।

1:57अनुभव के वक्त अपने को ढूंढना नहीं पड़ता है परमात्मा किधर है।

2:04परमात्मा हाजिर प्रत्यक्ष है और हम ज्ञान से उसको महसूस कर सकते हैं वर्तमान में।

2:09इसीलिए मैं ही परमात्मा हूँ ऐसा करके स्वरूप में रटी लगानी पड़ती है।

2:17लगानी पड़ती है।

2:18और उसमें इंद्रियों का और मन का कोई role नहीं है।

2:22पहली बार भी ऐसा ही होता है और आगे भी बार-बार बार-बार वही कार्य करना। अनुभव के बाद दूसरी quality हो गई ऐसा नहीं है।

2:31जिस विधि से परमात्मा का अनुभव होता है उसी विधि से दूसरी बार तीसरी बार चौथी बार बार-बार बार-बार वही system से कार्य करना है।

2:40पहले के वो बाद के पुरुषार्थ के प्रकार...

2:45वो बात के पुरुषार्थ के प्रकार में कोई प्रकार का फर्क नहीं है।

2:49पुरुषार्थ माने?

2:51साक्षी भाव रहना, उपयोग को अंदर लेके आना, ये सब पुरुषार्थ नहीं है, ये तो पढ़ाई करते हैं।

2:58मेरा उपयोग बाहर क्यों है, अंदर क्यों नहीं आता है?

3:02चलो जान दो, मैं साक्षी भाव में रहूं।

3:06चलो मैं मेरे आत्मा को जानूं, उसका ध्यान करूं।

3:10ध्यान करने वाली भी अवस्था...

3:14ध्यान करने वाली भी अवस्था है।

3:16जानने वाली भी अवस्था है, किरण है मतलब।

3:18अवस्थामति की अवस्था।

3:20साक्षी भाव में रहने वाली भी किरण है, चिंतन करने वाली भी किरण है, मन के माध्यम से।

3:26भाई मेरा कोई कारण नहीं, परमात्मा का कोई loan नहीं है।

3:32इसीलिए मुझे ध्यान भी नहीं करना।

3:34चाहे दर्शन भी नहीं चाहिए।

3:38हो गया तो दर्शन चाहिए, हो गया तो है नहीं, दर्शन चाहिए।

3:42दर्शन टाई गुरु।

3:43इसी प्रकार पहले के और बाद के पुरुषार्थ के प्रकार में कोई प्रकार का फर्क नहीं होता।

3:51अब ये पुरुषार्थ क्या चीज है कैसे करना है?

3:56ये समझना है।

3:58इसीलिए बुद्धदेव श्री का यथार्थ समझन पर बार-बार जोर रहता है।

4:01समझ पीछे सब सरल है।

4:05जिन समझे मुश्किल है।

4:07समझ में आ गया तो।

4:10समझ में आ गया तो इतनी सी बात है। गलती कितनी है मामूली गलती।

4:15गिद्दी करना आता है।

4:17लेकिन अपने को भूलना उसकी मामूली गलती है।

4:21बात इतनी सी है।

4:23तारो दोष एटलो ज के अन्यने पोतानु माने अने पोते पोताने।

4:27बात तो इतनी है।

4:28खुद परमात्मा और चाहता है मेरे को आत्मा के दर्शन होंगे।

4:33ये गड़बड़ हो गई है।

4:36ये गड़बड़ है।

4:38ये गड़बड़ है। समझ में नहीं बैठा है बड़ा।

4:42अब ये बात विद्वानों के दिमाग में भी नहीं आ रही है।

4:46वो कुछ करना चाहते हैं, आत्मा के दर्शन के लिए शास्त्र पढ़ना चाहते हैं, पूजा भक्ति करना चाहते हैं, संसार से अलग हो जाना चाहते हैं, अकेले रहना चाहते हैं।

4:58ऐसा कुछ भी नहीं है।

4:59कुछ करेंगे तो होगा, आज नहीं तो कल होगा, परसों होगा, पर...

5:05आज नहीं तो कल होगा, परसों होगा, परसों होगा।

5:08आज अभी इसी वक्त हो।

5:10कल करूँगा तो गड़बड़ है, समझ बराबर नहीं होगा।

5:15अगर समझ में बैठ गया तो अभी इसी वक्त, इसी second में आत्मा का अनुभव हो सकता है।

5:21समझ नहीं आया कब तक परेशानी, कोई कल पे, परसों पे डालता है।

5:26दीया रखना है, हो जाएगा।

5:29ऐसा, ऐसा लगता है, खुद ही खुद ही session ले लेता है।

5:33निर्णय ले लेता है।

5:35ये सब धीरज की उतावली नहीं करना, शांति रखना, सद्गुरु का शरण लेना, सत्संग करना, भक्ति करना, ये सब जो भी बातें हैं, वो अनुभव के वक्त की नहीं हैं।

5:45अनुभव के वक्त पूरा change हो जाता है, scenario change होगा।

5:51अब तक जो कुछ करना था करना था, अब नहीं करना कुछ भी नहीं है।

5:56आत्मा का ध्यान वो भी नहीं करना है।

5:59दर्शन कब होंगे वो भी मत...

6:01नहीं करना है दर्शन कब होंगे वो भी मत पूछो।

6:06पूरा scene ही change होता है।

6:08ये समझना बहुत जरूरी है इसीलिए गुरुदेव जी का यथार्थ समझन पर बार-बार जोर रहता है।

6:13क्योंकि इस प्रथम समझन में ही भविष्य का सम्यक पुरुषार्थ भर दिया।

6:18ये समझ में आ जाए, अनुभव हो जाए, तो बाद में कैसे-कैसे आगे बढ़ना, कैसे कर्मों की निद्रा करना, और साथ साथ आस्था मांगना, पूरा मुक्ति का मार्ग खुल जाता है।

6:30पूरा मुक्ति का मार्ग खुल जाता है।

6:32आत्मा का अनुभव हुआ।

6:34line clear हो गई।

6:35जब तक अनुभव नहीं है तब तक परेशान।

6:36तब तक doubt है, शंका है।

6:38कभी-कभी गुरु में भी विश्वास नहीं आता है।

6:41तब तक धीरज रखते हैं।

6:43कुछ सही लगता है और कहीं गुरु में गड़बड़ की हो, ऐसा करके ना हो जाता है।

6:49कुछ बात छुपाते होंगे मेरे से।

6:52मेरे से clear बात नहीं कर रहे।

6:55कुछ ना कुछ तो हो जाता है।

6:57जाता है। धीरज रहना मुश्किल है।

7:00ये इसीलिए है कि समझ बराबर नहीं है। समझ अगर आ गई अनुभव कैसे कर लो उसकी समझ आ गई plan क्या है।

7:07इस प्रथम समझण में ही भविष्य का सम्यक पुरुषार्थ बढ़ गया। अब ये पुरुषार्थ की शुरुआत कहाँ से कर लो?

7:15समझ के लिए शास्त्र पढ़ने की जरूरत नहीं है। क्योंकि वो दे दी है।

7:21भजन कितनी भी अच्छी हो।

7:23लेकिन ऐसी...

7:26लेकिन experience की बात ही कोई अलग है।

7:30School की पढ़ाई, college की, double graduate थी।

7:33वो अलग है और हम कहीं नौकरी करने जावे उसका जो experience है वो अलग होता है।

7:38Experience बहुत बड़ी चीज़ है।

7:41भले MBBS पढ़े तो हैं हम।

7:44लेकिन जब तक किसी doctor के हाथ के नीचे हम training नहीं लेंगे तब तक हमको degree नहीं मिलती।

7:51भले हम chartered accountant...

7:53भले हम chartered accountant first class pass pass हुए।

7:56लेकिन किसी chartered accountant के हाथ के नीचे practical experience नहीं किया, तब तक degree नहीं मिलती।

8:03Scooter चलाना है, scooter खरीद लिया है, car खरीद लिया है, लाखों ₹।

8:10लेकिन जब तक चलाया नहीं आया practical, parties से license नहीं मिलता है, तब तक आप road पर निकाल नहीं सकते।

8:18देखो।

8:18Practical की बहुत बड़ी...

8:22Practical की बहुत बड़ी चीज़ और बहुत बड़ी value है।

8:26संसार में भर दो।

8:28इतनी भी होशियार लड़की क्यों ना हो, रोटी गोल बना के देना वो तो practical subject है।

8:32कितना भी कर लो, कितनी भी अच्छी हो, पढ़ी लिखी हो, रोटी गोल बनाना वो पढ़ाई से नहीं आता है।

8:39और खुद को practical strength भी करना पड़ता है।

8:44ये practice की शुरुआत कहाँ से करो?

8:48इस practice की शुरुआत...

8:50इस practice की शुरुआत अवलोकन से शुरुआत होती है।

8:54क्योंकि अवलोकन जो है वो 5 इंद्रिय और मन के आधार पे नहीं है।

9:00अवलोकन है रे आत्मा के आधार पे।

9:04और उसमें ज्ञान को हम practice करते हैं।

9:07कि सिर्फ जानना देखना है, सिर्फ जानना देखना है।

9:11कुछ भी हो जाए, सर कट जाए तो भी जानना देखना है।

9:14रोना आ रहा है, घबराहट हो रही है।

9:16दुख हो रहा है, नहीं।

9:18दुख हो रहा है, नहीं जानना नहीं।

9:19एक ही जवाब, इसका जवाब नहीं, जितना भी प्रश्न करो, क्या करूँ, क्या करूँ, कैसे करना, कब क्या करना, अवलोकन करो।

9:27क्योंकि अगर ये समझ में आ जाएगा ना,

9:31आत्मा का अनुभव करने में देर नहीं लगेगा।

9:35जिसने अवलोकन नहीं किया है, practical practice नहीं किया है, उसको अनुभव होने वाला भी नहीं है, 3 साल में कभी भी हो।

9:42एक पात्र होवे तो अनुभव होवे ना।

9:45तो अनुभव हुआ ना।

9:46बिना पात्र कैसे रखोगे बर्तन में कोई नीचे?

9:51रूडे बोलते थे कि ये आत्मा की बात विरले को समझ में आती है।

9:54ये कोई छोटी मोटी बात नहीं है।

9:57सम्यक दर्शन प्राप्त करना माने क्या बहुत बड़ी बात होती है।

10:02अनंत अनंत करोड़ अरब रुपये का कर्जा चुका गया। कितना?

10:05सम्यक दर्शन वाला क्या होगा?

10:07अनंत अनंत अरब करोड़ रुपये का कर्जा चुका गया अनंत अनुमंदी चले गए।

10:13अनंतानुमिति चले गए।

10:14कितना बाकी रहा अभी परमात्मा को नहीं बनाया?

10:18आधे ₹ का कर्जा बाकी रहा। कितना बोल रहे?

10:22कितना बाकी रह गया?

10:25आधे ₹ का कर्जा।

10:26तो इतना फर्क पड़ जाता है पहली बार आत्मा जन्म लेती है।

10:30कितनी कितना बड़ा फायदा?

10:34अभी तो शुरुआत हुई है अभी।

10:35समय दृष्टि समय दृष्टि को क्या बोलते हैं? बच्चा बोलते हैं छोटा बच्चा।

10:41बच्चा बोलते हैं छोटा बच्चा।

10:44चौपान करने वाला।

10:44अभी श्रावक कहाँ बना है? अभी तो मुनि कहाँ लगा है?

10:47अभी श्रेणी कहाँ लगाई? अभी तो परमात्मा कहाँ बना है?

10:50लेकिन इस छोटे बच्चे में कमाल देखो कैसे है।

10:53छोटा है लेकिन जीने तोर का बेटा है।

10:55मिस्ता है।

10:56भले आज ही जन्मा है लेकिन क्या बोलते हैं? राजा पैदा हुआ।

11:01राजा के घर कुंवर आया तो क्या बोलते हैं?

11:03राजा।

11:04राजा पैदा हुआ।

11:05वो भविष्य को देखते हैं। राजा जाने एक बार गादी में कौन बैठेगा।

11:09इसे को देखते हैं राजा बनने के बाद गादी में कौन बैठने वाला है?

11:14इसीलिए।

11:15सब डर से होते हैं पूरे गाँव के अंदर लगा के अंदर।

11:19क्यों डर से होते हैं? क्योंकि आज हमारे राजा का जन्म हुआ है।

11:22ऐसे जन्म कल्याणक के दिन होते हैं तो पंच कल्याणक होती है ना।

11:28तो जन्म कल्याणक महोत्सव में भगवान को लेके आते हैं बानू शिला के ऊपर।

11:33महोत्सव मनाते हैं।

11:34और फिर नाचते हैं गाते हैं।

11:37और गाते हैं गाते हैं।

11:39क्योंकि आज भगवान का जन्म हुआ।

11:41अभी भगवान बने नहीं अभी तो गर्भ में से बाहर निकले हैं।

11:44लेकिन बोलते क्या हैं?

11:48भगवान का जन्म हुआ।

11:50ऐसे ही आत्मा का दर्शन हुआ माने क्या हुआ?

11:55सिद्ध भगवान का जन्म हुआ।

11:58सिद्ध भगवान जन्मे।

12:01ये कोई छोटी मोटी बात नहीं है।

12:03ये अनंत काल से चली आ रही गलती थी कौन सी?

12:05चली आ रही गलती थी कौन सी?

12:08दूसरों को अपनाना और खुद को...

12:10वो गलती खत्म हो गई।

12:12ये संसार का जो मूल है वो खत्म हो गया।

12:17Cutting हो गया। हमेशा के लिए अभी दोबारा झाड़ उगने वाला नहीं है।

12:23पत्ते भले अभी भी हरे हैं, दाने भी हैं, ऐसा का वैसा खड़ा है झाड़।

12:27लेकिन अंदर से मूल कट गए।

12:29तब क्या होगा?

12:30वो झाड़...

12:34ओ झाड़, कितनी भी बारिश गिरे तो भी ये पनपने वाला नहीं है।

12:38इसकी तो मौत आ गई है अब।

12:40इसका, इसके संसार की मौत आ गई। संन्यास दसम हुआ माने क्या हुआ?

12:44इसके कर्मों की, इसके राग द्वेष की, सबकी मौत हो गई है अब।

12:48अब आयु खत्म होने होते जा रहा है, होते जा रहा है, धीरे-धीरे-धीरे करके संसार खत्म हो जाएगा, जन्म मरण मिट जाएंगे और भगवान बन जाएंगे।

12:58ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं, छोटी-मोटी घटना नहीं है।

13:01मोटी बात नहीं छोटी मोटी घटना नहीं अनंत काल में नहीं की है ऐसी घटना नहीं।

13:06बड़े बड़े विद्वानों को बड़े बड़े त्यागियों को नग्न दिगंबर मुनिआजों को नहीं होता है ऐसी बात है।

13:14लेकिन इसका मूल कहाँ है?

13:15ये सम्यक दर्शन कैसे प्रकट होगा?

13:18यथार्थ समझ के बिना सम्यक दर्शन प्रकट नहीं होगा।

13:22समझ यथार्थ चाहिए।

13:24हम भटक जाते हैं एक नौकरी मनमानी से पसंद और दूसरा।

13:29वचन और दूसरा गलत गुरु मिल जाते हैं।

13:35तो फँस जाते हैं।

13:36आत्मकल्याण करना है।

13:38लेकिन हमारे जैसा बुद्धि में समझ में आएगा ऐसा करना।

13:44और कुगुरु की बात मानते हैं।

13:48कहा।

13:49अब problem तो।

13:50बिधातादम भो करे।

13:52करि कल्पना।

13:53अथवा असद्गुरु तके।

13:54उल्तो वर्धो भवता।

13:58छूटना चाहता है लेकिन अपनी मति कल्पना से छूटना चाहें तो कैसे?

14:04Impossible चीज़ है।

14:07हम तो अज्ञानी हैं और मति कल्पना लगावे बुद्धि लगावे कैसे होगा?

14:12अपनी बुद्धि को तो दरिया में डाल दिया।

14:16अपनी बुद्धि भले पढ़े लिखे हैं कितने भी होशियार हो।

14:20दुनिया में हमारा नाम इज्जत हो तो भी ऐसी बुद्धि इस मोक्ष मरण में काम आने वाली नहीं।

14:25काम आने वाले हैं।

14:26ये प्रथम समुझा में ही भविष्य के सम्यक पुरुषार्थ करते हैं।

14:32आत्मा का ध्यान असल में करना ही नहीं है।

14:35लेकिन कभी नहीं बोले कि आत्मा से प्रेम करो, आत्मा का ध्यान करो, आत्मा की भक्ति करो।

14:41ऐसा नहीं हो रहा है, सद्गुरु के पास ढूंढो, सद्गुरु से guidance में रहो, उनके शरण में रहो।

14:47और नहीं मिल रहा है, सत्संग करो, साधना करो।

14:50अब तक जितनी भी बात थी कुछ...

14:54अब तक जितनी भी बात थी कुछ करो, करो, करो और कुछ ना करो।

14:57वहाँ मत फसो, उधर मत फसो, इधर मत फसो, ऐसे संग में मत रहो।

15:01ऐसी बात थी।

15:02लेकिन यहाँ जब पहली बार अनुभव होता है वहाँ,

15:06कुछ करो ऐसा भी नहीं है, कुछ नहीं करो ऐसा भी नहीं है।

15:11लेकिन इसकी practice कहाँ से शुरू करना?

15:14इसकी practice शुरू करना है।

15:17ये main चीज है।

15:17वहाँ से धीरे-धीरे धीरे-धीरे develop करते-करते-करते ज्ञान...

15:21धीरे-धीरे develop करते-करते करते ज्ञाता दृष्टा भाव को सहज ज्ञाता दृष्टा भाव को develop करते-करते ऐसी जगह पे ले आए।

15:28एक मोड़ आ गया है।

15:29कि अब कहीं भी रामदेव संतन की ओर से मात्रा पे नहीं आए।

15:35मन खत्म हो गया है।

15:36कि उजाला होने वाला है तो क्या होता है अंधेरा पहले 2 घंटे पहले ही भाग जाता है।

15:44क्या देखना कभी सूरज होता है तो सूरज बाद में आता है।

15:48अमावस की रात।

15:51अमावस की काली रात क्यों ना हो।

15:53दो घंटे में रात खत्म होती है इसके बाद दो घंटे के बाद सूरज चढ़ती है।

15:57नया सवेरा होने वाला है।

16:01मन तो पहले ही मर जाता है क्योंकि मन की ताकत नहीं होती उस तेज को तेज करने की ताकत मन में नहीं होती।

16:08अनुभव प्रकाश से एक दृष्टांत।

16:10महान योद्धा अगर मैदान में आता है।

16:15उसकी वीरता को देख कर के।

16:17की वीरता को देख कर के।

16:18जिसके कायर लोग हैं ना।

16:23वो सामने ही नहीं आते।

16:26चार फेंक कर के।

16:27भाग भाई भाग जल्दी से।

16:29मतलब मौत है।

16:31वो सामने ही कुंभकरण आता था ना मैं समझ में तो।

16:34इतना बड़ी कायर लोग।

16:35देख कर के जिसके वो कायर लोग तो भाग कर।

16:39लड़ना इससे क्या लड़ना है मर्दानगी क्या है क्या।

16:42भागो यहाँ से भाग तो।

16:43लड़ना।

16:46लगना नहीं।

16:47बेमत मरने को कौन जाना बेकार।

16:51उसी प्रकार से मन तो।

16:53मन की तो कोई value नहीं है परमात्मा के दर्शन करे थे।

16:58मन तो पहले ही मरना।

16:59पार्ट ही नहीं है और मन में तो कोई सामर्थ्य ही नहीं है परमात्मा का सामना करने।

17:05एक ज्ञान परमात्मा की ही किरण है।

17:10अंदर में एक ज्ञान का सागर है बिना तली वाला।

17:13बिना कलिया वाला।

17:14उसकी किरण है वही उसको।

17:17उसके दर्शन कर सकते हैं लेकिन उसको भी जबरदस्ती आप करोगे तो नहीं होगे।

17:22कि नहीं तुम अंदर जाओ बाहर क्यों देखते हो अंदर जाके भगवान को देखो।

17:27नहीं होता।

17:28हम रोते रहते हैं कब होगा अनुभव कब होगा।

17:31अब तो लेके ही जाना है अनुभव अब तो अब तो ऐसा भी कर लेना आज तो बस खाना नहीं खाना है अनुभव।

17:36आज तो आँख खोलना नहीं।

17:38ऐसा करके 1 घंटा 1.5 घंटा कर।

17:42ऐसा करके 1 घंटा 4 घंटा 10 घंटा और 1 second का काम है 4 घंटे का काम ही नहीं है।

17:46समझ में आया तो ठीक है नहीं आया तो 1 second का भी काम है।

17:52शुरुआत वाले को अनुभव करने के लिए कैसा प्रयत्न करना चाहिए?

17:56प्रश्न पूछा भगवान ने।

17:59तो शुरुआत वाले को अनुभव करने के लिए।

18:03ऐसा नहीं बोले कि पहले आत्मा की रुचि करो, सम करो, ज्ञानी को ढूंढो, उनके शरण में जाओ, उनकी भक्ति करो।

18:09उनकी भक्ति करो।

18:10अवलोकन करो, ध्यान करो।

18:13क्या?

18:14ऐसे कोने में जाकर के गुफा में बैठ कर के ध्यान करना आत्मा का।

18:19इतनी पूजा भक्ति करना, कुछ नहीं।

18:22एक शब्द नहीं उसके बाद।

18:26शुरुआत वाले को अनुभव करने के लिए क्या प्रयत्न करना?

18:31Answer.

18:31मैं पर्याय मात्र से भिन्न हूँ।

18:35हो गया छुट्टी?

18:37कुछ तो बोलो हम तो कुछ करने के लिए बुलाए हैं क्या करना?

18:43या हाँ बोलो या ना बोलो कुछ तो बोलो नहीं तो बात नहीं करने और नहीं करने की बात नहीं क्या बोले?

18:52मैं तो पर्याय मात्र से...

18:54करना भी अवस्था में है और नहीं करना भी अवस्था में है और मैं दोनों से पार हूँ।

19:01मैं परमात्मा हूँ मैं करने धरने वाला नहीं हूँ।

19:05डरने वाला नहीं हूँ।

19:06उपयोग को अंदर लेके आना मेरा काम नहीं है, वो उपयोग उसको करना है तो करे, मेरा ध्यान।

19:12मुझे तो ध्यान नहीं करना है।

19:14जरा सी भूल लगती है कि क्या फर्क पड़ता है, ऐसा बोलो कि भई तुम ध्यान करो आत्मा का।

19:19और ऐसा बोलो कि नहीं पर्याय को ध्यान करना है तो करे, मुझे ध्यान नहीं करना है।

19:27फरक क्या है?

19:28आखिर अनुभव तो तभी होने वाला है जब उपयोग अंदर में जाएगा तब।

19:32फिर ऐसा बोलो कि...

19:34फिर ऐसा बोलो तेरा ऐसा बोलो क्या फर्क पड़ता है?

19:37कि नहीं मुझे आत्मा का ध्यान करना है तो उपयोग को अंदर लेके आओ ऐसा बोलो।

19:41या फिर नहीं मैं तो परमात्मा हूँ और पर्याय को ध्यान करना है तो करें।

19:45इन दोनों में फर्क क्या पड़ गया?

19:47एक में पर्याय को खींच के लेके आने का कत्तको भाव है।

19:51ऐसे दर्शन करना अपने हाथ मुट्ठी में है यार।

19:55नहीं नहीं अपनी मुट्ठी में नहीं है।

19:56और जिसको ये समझ में आएगा कि मेरी मुट्ठी में ये नहीं है।

20:01समझ में आएगा कि मेरी मुट्ठी में ये नहीं है कि मैं दर्शन भी कर सकता हूँ अपने आत्मा को। इसको दर्शन मिला कहते हैं।

20:07ये कैसी कमाल की बात है। दर्शन किसको होंगे आत्मा के?

20:13जिसको ये समझ में आ जाएगा कि मैं अपने उपयोग को बाहर से अंदर भी नहीं लेके आ सकता।

20:17इसलिए मुझे इतनी भी मगजमारी नहीं करनी।

20:20बस, तो अभी second में दर्शन हो जाएगा।

20:24secondों का काम है। ये समझ पीछे सब फुर्र है। बिन समझे मुश्किल।

20:29ये बात...

20:29मुश्किल।

20:30ये बात इधर लिया है प्रथम।

20:32और बाद के पुरुषार्थ में प्रकार में कोई प्रकार का अंतर नहीं।

20:38इसीलिए गुरुदेव जी का यथार्थ समझ पर बार-बार जोर रहता है।

20:42समझो आप, समझो आप।

20:43बाद में करना, अनुभव बाद में करना, पहले समझो कि अनुभव करने की विधि क्या है।

20:48और जल्दी नहीं, इतनी देर हो गई अनंत काल चले गए तो।

20:53अभी समझने में थोड़ा time लगेगा तो कोई घर।

20:56दुखी होने की...

20:57तो कोई दुख होने की और घबराने की कोई जरूरत नहीं।

21:00क्योंकि इसके बिना तो होने वाला ही नहीं।

21:05इसलिए अनुभव भले ही थोड़ा late हो जाए लेकिन पहले आप समझो।

21:08कि कैसे किया जाता है काम।

21:10या माला पहनने से काम किया जाता है, शास्त्र पढ़ने से काम किया जाता है।

21:14घर बार छोड़ कर के लग्न दिगंबर बनने से काम होता है।

21:18कैसे काम होता है?

21:18घर में नहीं होगा सोनगढ़ में जाके होगा गुरुदेव के पास ऐसे काम होता है, ऐसे काम होता है।

21:25समझो।

21:25काम होता है, कैसे काम होता है, समझो।

21:29गुरुदेव जी का यथा समझण पर बार-बार ज़ोर रहता है।

21:32क्योंकि इस प्रथम समझण में ही भविष्य का सम्यक पुरुषार्थ धरती है।

21:39शुरू में गलती की, अंत तक गलती होगी।

21:42बड़ा example दिया है लेकिन एक और एक तीन कर दिया।

21:461 + 1 = 3.

21:48He multiply by 5 is equal to...

21:50कितना आया? 15 आया।

21:51असल में कितना होना था?

21:5315 aaya.

21:54Asal mein kitna aana tha? 10.

21:561 + 1 = 2.

21:58Multiply by 5 = 10 hona tha.

22:00Ab yahan gadbad kya hua?

22:021 + 1 = 3.

22:03Multiply by 5 = 15.

22:05Ab iske baad aur kitne bhi kar lo.

22:07Multiplication karo, division karo, jo bhi karo.

22:13Result kya aayega?

22:14Pass ke na pass?

22:15First entry galat, baaki sab sahi hai.

22:21बाकी सब सही है।

22:22कोई fault नहीं।

22:243 into 5 15 ही होते हैं।

22:26क्या?

22:2615 into 3 45 ही होते हैं। सब perfect है।

22:31Beginning में गड़बड़ी है। क्या?

22:331 plus 1 is equal to 2 की जगह पे 3 लिख दिया।

22:36ये क्या चीज है? इसको क्या बोलते हैं? मूल की गलती।

22:42Foundation fault.

22:43Building तो बहुत अच्छे बनाए हैं। Color तो बहुत जबरदस्त। Window जबरदस्त। Lift जबरदस्त।

22:49दो जबरदस्त lift जबरदस्त।

22:51Everything fine कोई कसर नहीं है।

22:53लेकिन भैया foundation जो है ना दो मंजिले का ही है और माला बनाया है दस।

22:59क्या होने वाला है?

23:00ये जोर से हवा आएगी ना तो भी गिर जाएगा।

23:05धरती कम की जरूरत नहीं है।

23:08थोड़ा एक हवा का झोंका आने दो बीजे चल रही थी बात।

23:12गया और ये नहीं पूरा मिट्टी में मिल जाएगा।

23:17मिल जाएगा।

23:20ये प्रथम समझन, प्रथम की यथार्थ समझ के ऊपर भविष्य का सम्यक पुरुषार्थ घर बैठे है। क्या वचन निकले हैं?

23:28कि ये just a like a slogan है, भगाणी जी का slogan है।

23:33सकार विचार तो पावन नहीं पड़ते, छोटे-छोटे मंत्र रखे हैं। ये भगाणी जी का मंत्र है।

23:40कि प्रथम की यथार्थ समझन के ऊपर भविष्य का सम्यक पुरुषार्थ घर बैठे है।

23:45आपको हो गया आपको हो गया आपको हो गया फटाफट बोल दो ताकि क्या हो रहा है?

23:50जाड़ पे लगे हैं समय दस में अभी हो जाएंगे।

23:53क्या?

23:53बोल तो दिए लेकिन बाद में संभालेगा कौन?

23:55और क्या हुआ ठीक है?

24:00क्या समय दस में एक ऐसी चीज है कि निपटा लेगा काम फिर बाद में दूसरे बहुत काम हैं।

24:07stage pass कर दो।

24:08stage pass safe हो जाए ना बाद में आप।

24:10बाद में जो चाहे कर सकते हो।

24:12शादी कर सकते हो।

24:13जो चाहे कर सकते हो। शादी कर सकते हैं, उठापटक कर सकते हैं, business कर सकते हैं, किसी का पैसा डुबा सकते हैं, किसी को तकलीफ दे सकते हैं, क्योंकि उसी में मोक्ष जाना निश्चित हो गया है, अब कितना ही पाप करो।

24:25जैसा करना है ऐसा करने को तैयार हैं हम।

24:32अगर आप 2 घंटे शीर्षासन करने को बोलेंगे तो भी करने को तैयार हैं।

24:36Sir नीचे और पैर ऊपर।

24:39क्या?

24:39काँसे की पट्टी बांध देंगे, कान में दूध डाल देंगे, जैसा बोलो ऐसा करने को तैयार हैं।

24:46करने के लिए तैयार है।

24:48इतना जल्दी मिलता है तो क्या कि बाद में काम निपटे ना एक।

24:50इतना भी बहुत है ना अपने पास।

24:52काम कितना है बहुत सारा काम है हमारा।

24:55एक आत्मदर्शन के अलावा ये जीव जो कुछ भी करता है वो बंधन का काम है।

25:01कि जल्दी से आत्मदर्शन करके बाद में नहीं फसूँ वापस।

25:07ये प्रश्न पूछा है चौदहवीं में।

25:09पहले की बात जाने दो लेकिन आत्मा का अनुभव करने के बाद तो फिर न्याय।

25:14अनुभव करने के बाद तो फिर न्याय नीति से तो paper धंधा तो कर सकते हो ना?

25:17क्या पूछा है?

25:19तो पहले करने में गड़बड़ है लेकिन बाद में अनुभव होने के बाद तो बेईमानी से नहीं बोल रहा हूँ मैं लेकिन नीति न्याय से धंधा तो कर सकते हैं ना?

25:28ईमानदारी से धंधा कर सकते हैं कि नहीं कर सकते?

25:32अनुभव होने के बाद अभी नहीं अभी तो पहले अनुभव करना है।

25:36बाद में बाद में की बात बोल रहा है।

25:39कब पूछ रहा है?

25:42पूछ रहा है।

25:44होने के पहले पूछ रहा है और होने के बाद पूछने भी नहीं आएगा कि मैं क्या करूँ।

25:50क्योंकि ये जो problem है ये अज्ञान में से निकला है।

25:52क्या?

25:53कि बाद में तो मैं ईमानदारी से business तो कर सकूँगा ना आत्मज्ञान होने के बाद।

26:00फिर तो कोई problem नहीं रहेगा ना।

26:05इतनी मेरे को छुट्टी दे दो मतलब गर्भित है वो चीज़ कि मुझे संसार में रहना है।

26:12व्यापार धंधा करने के लिए।

26:13ईमानदारी से व्यापार धंधा नहीं, ईमानदारी से व्यापार धंधा करने के लिए मुझे इस दुनिया में रहना है।

26:20लेकिन क्योंकि अनुभव की इतनी value है तो पहले अनुभव कर लो।

26:23बात बुरी।

26:23कि अब तो कोई गड़बड़ नहीं है, अब तो सब ठीक है ना?

26:28अनुभव कभी होने वाला ही नहीं है ऐसे लोगों का।

26:30क्योंकि बाद में कुछ करना है।

26:32नहीं करना है।

26:33अनुभव जैसे...

26:39अनुभव जैसे स्वर्ग में जाना है तो अपने को मरना पड़ता है।

26:41क्या?

26:42मरे बिना कोई दूसरों को भेज देंगे क्या?

26:46अपने को स्वर्ग में जाना है ना तो अभी मैं बहुत busy हूँ यहाँ पर दुकान में।

26:53तुम जाके आओ।

26:53ऐसा होता है कभी?

26:54कि अगर स्वर्ग में जाना है तो अपने को मरना पड़ता है इसी प्रकार से।

26:59आत्मा को अनुभव करना है तो तो इनको मिटा देना पड़ता है।

27:03अब देवचंद भाई भी अब नहीं रहेंगे।

27:06जन भाई अब नहीं रहेंगे।

27:07इसकी मौत हो जाएगी।

27:09क्या? ये द्विज है, द्विज माने ब्राह्मण। ब्राह्मण, ब्राह्मण का जो पुराण अर्थ क्या है? द्विज।

27:18द्वि माने दो, दूसरा।

27:20ज माने जन्म, दूसरा जन्म लेता है वो ब्राह्मण है।

27:24पवित्र माना जाता है ना चार जाति में। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। ये सबसे best, राधा से भी ऊंचा कौन?

27:32उसको कभी भी किधर भी राजा...

27:34उसको कभी भी किधर भी राधा के महल में any moment कभी भी घुसने की VIP pass मिलता है ब्राह्मण को।

27:39किधर भी घुस सकता है महल में कोई रोकने वाला नहीं है। ब्राह्मण है तो सब कुछ करते हैं।

27:46क्योंकि वो दुर्वासा मुनि ऐसा श्राप दे देंगे तो।

27:48राधा पाठ सब खत्म हो जाए। लोग राधा भी डरते हैं उनको।

27:52उनको कभी भी कहीं भी जाने की छूट है।

27:57ऐसे ब्राह्मण सबसे top हैं। लेकिन ये ब्राह्मण...

28:02सच्चे top है लेकिन ये ब्राह्मण इसका दूसरा जन्म हुआ है वरना क्या?

28:05कि अज्ञान दशा में जो जन्म था जो अपने को देवचंद भाई मानता था शरीर वाला मानता था।

28:10कुटुंब परिवार वाला मानता था।

28:12इसकी तो मौत हो गई तभी तो आत्मा का ज्ञान हुआ है।

28:15देवचंद भाई को ईमानदारी से धंधा करना था।

28:19अनुभव के बाद।

28:19लेकिन वो कैसे करेंगे वो तो खत्म हो गए मर गए देवचंद भाई।

28:25जब अनुभव होगा तो उनको तो मरना पड़ेगा देवचंद भाई को।

28:30अनुभव होगा तो उनको तो मरना पड़ेगा देवचंद भाई को। बाद में तो अनुभव होगा ना।

28:34बाद में वो क्या बोलेंगे?

28:36बाद में ऐसा बोलेंगे मैं देवचंद भाई हूँ और मुझे तो अनुभव हुआ।

28:41मैं परमात्मा हूँ।

28:42देवचंद भाई खत्म हो गए। अब कौन बंदा करेगा?

28:46अब जो भी होगा इस शरीर से उसको परमात्मा जानेगा देखेगा करेगा बरेगा कौन?

28:51करने की बात तो खत्म हो गई।

28:53ये समझ में आवे तो अनुभव होवे कहने का मतलब।

28:55ये अगर समझ में आवे तो।

28:58ये अगर समझ में आवे तो अनुभव है, अगर ये समझ में नहीं आए तो अनुभव नहीं है।

29:02इसलिए प्रथम की यथार्थ समझ में ही भविष्य का सम्यक प्रज्ञान उत्पन्न है।

29:10This is a very best slogan.

29:12इसके ऊपर लेना है तो इसी वाक्य के ऊपर अपुन महीना भर दो महीना तक ले सकते हैं, इसमें इतना मसाला है।

29:21Reference contact करते हैं।

29:24किसी एक point पे।

29:25अभी...

29:28अभी कल परसों शायद होऊंगा पहले आगे का portion complete करना।

29:32समझ में का गड़बड़ है क्यों अनुभव नहीं हो रहा है?

29:36समझ अवलोकन से develop हुई और बाद में turning point जब मारपा है तब समझ का मारपा। लेकिन अवलोकन में जिसने practice किया है वही turn कर सकता है table को।

29:44जिसने starting में अवलोकन किया ही नहीं योग्यता develop नहीं हुई। रुचि क्षमता में पड़ी है उसको table कैसे turn करेगा?

29:54पढ़िए उसको table कैसे term करेंगे?

29:56संसार की रुचि अवलोकन से zero हो गई है ज्ञाता-सत्त्वा भाव।

30:00मति-शून्यता ज्ञान का practice हो गई है।

30:03बिना इंद्रिय बिना मन के साथ।

30:05अपना जो मति-शून्यता ज्ञान है उसकी practice चल रही है।

30:09एक अभ्यास हो गया है।

30:11जिसने रोटी गोल बनाना सीख लिया है उसको रोटी बनाना दो और जिसने कभी रोटी नहीं बनाई उसको बनाना दो क्या फर्क पड़ता है?

30:19क्या फर्क पड़ता है?

30:22फर्क पड़ता है।

30:24कि जिसने जिसको बनाना आता है वो तो फटाफट 5-10 minute में तो कितनी रोटी बना देगा और वो एक भी नहीं बना सके अभी तक।

30:3110 minute में वो 10 रोटी बना देवे कि ये जो नया पहली बार बैठा है ना वो एक भी रोटी नहीं बना सके।

30:39बनाना तो बाबा बोली इगाड़ा कितना करके रखे।

30:41कितनी रोटी खराब जल गई कितना मैंने देखा था और bread round नहीं हुई कैसे कैसे हो गई।

30:48bread खराब हो गया।

30:50Road खराब हो गया।

30:52कितना फर्क पड़ता है।

30:53ऐसा फर्क पड़ता है।

30:55जो अवलोकन करता है, तो आसानी से अनुभव कर लेता है।

30:586 महीने में अनुभव हो सकता है अगर अवलोकन सही किया।

31:03और शास्त्र बहुत पढ़े हैं, पूजा भक्ति बहुत किए हैं, नग्न नदी के ऊपर साधु बन गए हैं, लेकिन अनुभव करना है।

31:10तो अवलोकन के बिना भाई अनुभव नहीं कर पाए।

31:12ध्यान का तो अभ्यास है।

31:14Yes, अवलोकन से काम कर।

31:15Basic foundation.

31:16अवलोकन is key.

31:18अवलोकन इस केजी nursery।

31:20अवलोकन क्या है?

31:22ये ये शब्द लिखना है तो 15 दिन लगे।

31:26पूरे साल में A to Z लिखना है ज्यादा लिखना ही नहीं है।

31:29Spelling तो बनाना ही नहीं है।

31:31Operation करना नहीं है पूरे बाबा ने तो क्या करना है?

31:36रुकना नहीं है, हटाना नहीं है, पश्चाताप करना नहीं है।

31:39आप देखो बस।

31:40आपको एक ही काम दिया है, हटाने का काम अभी नहीं दिया है।

31:45आपको एक ही काम दिया है।

31:47आपको एक ही काम दिया है। ये क्या है? ये भी दस से class अवलोकन।

31:50लेकिन ये भी सब लोग नहीं करते।

31:53क्यों नहीं कर सकते सब लोग?

31:56अवलोकन सब लोग क्यों नहीं कर सकते?

31:59की भावना ही नहीं है।

32:02आत्महत्या की भावना नहीं है तो अवलोकन।

32:03पढ़े लिखे होंगे, बहुत व्यापार में आगे बढ़ गए होंगे।

32:09लेकिन अवलोकन करा के देवे, बोले कि नहीं होशियार है, बाकी होशियार नहीं है।

32:14बुद्धिमान है बाकी होशियार नहीं है।

32:17अध्यात्म के मार्ग में entry कब मिलेगी?

32:19आप अवलोकन करके बताओ।

32:21अपने आप को बड़े बुद्धिजीवी बात समझते हो।

32:23आप अवलोकन करके बताओ दूसरी बात जानो।

32:27एसी nursing class pass करो।

32:28इसके बाद आगे बढ़ेंगे।

32:32फिर अनुभव आप में करेंगे आत्मा में।

32:34पहले ये काम करके बताओ।

32:36ये बुद्धिजीवियों को challenge है।

32:40जो बुद्धि वाले हैं।

32:43बुद्धि वाले तो अपने को बहुत समझते हैं कि मैं भी कुछ हूँ।

32:47मैं भी कुछ हूँ और मैं कुछ भी कर सकता हूँ।

32:50ऐसे जिसको अंदर में बढ़ाई चल रही है, अभिमान चल रहा है।

32:53कम से कम अवलोकन करके दिखा दे कुछ ना कुछ।

32:56रोटी नहीं बनाना आता है तो कोई बात नहीं।

32:58पापड़ तोड़ना नहीं आता है तो कोई बात नहीं।

33:01तो भी तुम pass हो जाओगे।

33:04अगर अवलोकन करके बता दे तो।

33:06पूरी जिंदगी की सफलता।

33:10पूरी जिंदगी की सफलता इसके ऊपर निर्भर है।

33:12अवलोकन पर क्योंकि अवलोकन होगा तो ही आत्म का अनुभव होने वाला है।

33:16अगर अवलोकन होने के बाद सद्गुरु का मार्गदर्शन करके प्रयास किया गया तो।

33:21सम्यक दर्शन तो चुटकियों का खेल है।

33:23कोई बड़ी बात ही नहीं।

33:26लेकिन पहले ये कर के देखो।

33:30अब आगे कहते हैं।

33:31कैसे पुरुषार्थ करते हैं प्रश्न क्या था?

33:36प्रश्न ये था कि।

33:38प्रश्न ये था कि किस प्रकार आत्मा अपनी ओर वृद्धि का प्रयत्न करता है?

33:44जो प्रथम बार दर्शन किया है ये तो पुरुषार्थ तो बाद का पुरुषार्थ तो ज्ञान दशा के बाद ही है।

33:51वृद्धि का पुरुषार्थ तो बाद में।

33:54अनुभव का पुरुषार्थ वो तो सम्यक दृष्टि को करना है पहली बार।

33:58वृद्धि शब्द में ही फर्क है।

34:00वृद्धि वृद्धि आता है उसका मतलब क्या हुआ?

34:02कि पार तो लिया है।

34:02अज्ञान देख तो लिया है।

34:04फिर क्या कि उसको develop करना है।

34:06उसको develop करना है।

34:07शांति मिली तो है ऐसा नहीं है कि अशांत है।

34:09अंदर की इच्छा 0% है।

34:11अंदर आत्मा की शांति मिली है, स्वातता का है, अपना घर देख लिया है।

34:17तिजोरी में अपरंपार अनंत गुण हैं देख लिया है।

34:20अनंत शांति है देख लिया है।

34:21लेकिन शांति को develop करना है, वृद्धि करना है, वो तो ज्ञान अवस्था के बाद ही होता है।

34:28कैसे करता है?

34:29ये foundation में ये बताया है कि सम्यक...

34:34है कि सम्यक दर्शन समझ बहुत आगे बढ़ेगा।

34:36सम्यक समझ नहीं होगा आगे नहीं।

34:38अब अब अंतर देते हैं।

34:40कैसे करता है?

34:41अखंड जिसमें दो टुकड़े नहीं हैं।

34:44जैसे body में तो टुकड़े हैं हाथ पैर।

34:47body के अंदर जो रहता है ना।

34:49वो टुकड़े वाला चीज।

34:50क्या?

34:50तो बोलते हैं मुझे हाथ में महसूस हुआ।

34:57एसूस भले हाथ में हुआ।

34:58लेकिन जिसका महसूस किया।

35:03लेकिन जिसका महसूस किया है वो पूरे body में था।

35:08जो आपके इधर ये इस part में महसूस हुआ या इधर महसूस हुआ या इधर महसूस हुआ वो इतने में नहीं था।

35:13हाँ one piece था।

35:15संपूर्ण।

35:15कणिका आकाश अंदर में संपूर्ण।

35:18इसलिए आत्मा को देखना है तो।

35:22कोई लोग इधर दिल में देखते हैं।

35:25कोई उधर देखते हैं कोई आँखों से ऐसा करके देखते हैं।

35:30कोई आँखों से तस करके देखते हैं।

35:31ये सब गड़बड़ है।

35:34ऐसा कुछ भी नहीं है, वन पीस है अंदर।

35:36अखंड है, पूरा टुकड़ा वाला है।

35:39कोई शरीर के vibrations कोई...

35:40कोई इधर आया तो इधर दिखा मेरे को, ऐसा नहीं है, पूरे में है, भले इधर में... लेकिन पूरे में है, ये देखो ना, अखंड है।

35:47कोई हाथ में ही नहीं रहता है, पैर में ही नहीं रहता है।

35:50गाल पे ही नहीं रहता है, पूरे में है।

35:53अखंड ज्ञान घन।

35:55दूसरा पद ज्ञान...

35:58दूसरा शब्द है ज्ञान धन।

36:00ज्ञान धन का मतलब क्या?

36:03जैसे शक्कर pipe टुकड़ा देता है शक्कर।

36:08ऊपर तो शक्कर है, हाथ में जीभ लगा है तो अंदर...

36:11टुकड़े करने के बाद अंदर क्या, अंदर के अंदर...

36:14अंदर भी...

36:15मतलब...

36:15चूएंगे तो ऊपर तो ज्ञान है लेकिन अंदर में भी और काली जगह है।

36:23शैतान नहीं है।

36:23शक्कर के तो...

36:26शक्कर के टुकड़े में ऊपर सफेद पन्ना है।

36:29और touch करते ही मीठापन महसूस होता है।

36:33अब उसके लाख टुकड़े कर दो तो भी हर टुकड़े में white पन्ना होगा और मीठापन होगा।

36:40इसका मतलब क्या हुआ कि इतने बड़े piece में भी मीठापन है और इसके अंदर हर point के अंदर हर...

36:49अणु अणु में।

36:50अणु अणु में।

36:51अणु अणु में।

36:52gap होगा।

36:53बिना gap घन है घन।

36:54gap, दोनों है, दोनों।

36:56बिना gap।

36:58पूरा ज्ञान से लबालब भरा पड़ा है।

37:00ये सूरज के ऊपर के area में सिर्फ किरण निकलती है अंदर में।

37:05ऊपर इतना बड़ा round सूरज है।

37:10ऊपर से ही निकलती है अंदर नहीं है कुछ गर्मी वगैरह अंदर।

37:16upper ball नहीं है कुछ?

37:18upper ball अलग होता है।

37:22ये rubber ball अलग होता है।

37:25ऊपर rubber रहता है अंदर में पूरा हवा रहती है।

37:29पूरा ऐसा नहीं है कुछ।

37:32ऐसे आत्मा ऐसा नहीं है कि ऊपर ऊपर ज्ञान है अंदर में कुछ product बोल रहे हैं।

37:35नहीं एक तो ज्ञान घन है।

37:38अखंड ज्ञान घन।

37:38पुरुष आकार देखो fine body।

37:41स्त्री आकार क्यों नहीं बोला पुरुष आकार personify कर रहे हैं क्या?

37:46पुरुष आकार का मतलब है देहाकार।

37:50कार का मतलब है देहाकार।

37:51पुरुष का मतलब पुरुष का मतलब है आत्मा।

37:55पुरुष का अर्थ है पुरुषार्थी।

37:59आत्माार्थी ऐसा।

38:00पुरुष का पुरुष का मतलब है क्या?

38:03और sex की बात नहीं कर रहे कि gents या ladies ऐसी बात नहीं है।

38:09पुरुष का मतलब देहाकार।

38:10जिस देह में रहते हो।

38:12चाहे 4 feet के हो चाहे 3 feet के हो चाहे 8 feet के हो ऐसे ही हो।

38:17मोटे हो पतले हो।

38:18ऐसे ही।

38:18मोटे हो, पतले हो, काले हो, दुबले हो, सब बात है।

38:21अंदर में तो विहान रंग है।

38:24सभी का आत्मा एक तरह का है, काले आदमी का,

38:27गोरे आदमी का आत्मा,

38:29कैसा मिलेगा?

38:31मोटा आदमी का, काले आदमी का तो काला होगा और गोरे आदमी का गोरा होगा आत्मा।

38:36और मोटे आदमी का तो बहुत बड़ा होगा वजन वाला।

38:40नहीं बोला था वो, वो बेंगलोर वाला आदमी।

38:42आत्मा का वजन कितना, 3.5 की, वो तो मालूम है मुझे मालूम है, हाथ खड़ा किया।

38:46तो मुझे मालूम है हाथी का वजन।

38:47कितना है आपको मालूम है देखिए साढ़े तीन किलो।

38:50क्या हाथी का आत्मा का वजन कितना और कीड़े का आत्मा का वजन कितना?

38:56कितना है वजन?

38:57नहीं आत्मा में वजन नाम की कोई चीज नहीं।

39:04कीड़े का आत्मा और हाथी का आत्मा और भगवान का आत्मा सब एक पर है।

39:09आत्मा में इसमें कोई वजन जैसा रहता नहीं है पुरुष आकार है।

39:14शैतान को पुरुषाकार है।

39:15जैसा देह है वैसा अंदर में इस प्रकार से है।

39:18अखंड ज्ञान धन पुरुषाकार माने देहाकार शरीर।

39:24देहाकार।

39:25फिर शरीर ऊपर का जो दिखता है अंदर में जो दूसरा कर्म है 8 प्रकार के वो।

39:33इसके अंदर के रामदेव के भाव हैं वो भाव कर्म।

39:37इसके अंदर और एक।

39:38जानने वाली किरण।

39:42जानने वाली किरण।

39:43दूसरों को जानने वाली नहीं, अपने आत्मा को जानने वाली किरण।

39:49इसको शुद्ध पर्याय किरण।

39:51आत्मा की निर्मल अवर्ता।

39:53जिससे शांति मिले ऐसी अवर्ता, उसको बोलते हैं शुद्ध अवर्ता, शुद्ध पर्याय।

39:56उसका काम क्या है?

39:59शरीर को देखना, कर्मों को देखना, राग द्वेष को देखना।

40:03अपने आप को देखना उसका काम नहीं है।

40:05शुद्ध पर्याय किसको देखने की?

40:08शुद्ध पर्याय...

40:11सुपरयाताजी को नहीं देखती है।

40:13पाठ कर्मों को नहीं देखती है, अंदर के राजस के भावों को नहीं देखती है।

40:18पुण्य पाप के विचारों को नहीं देखती है, अपने को नहीं देखती है कि मैं ध्यान करने वाली हूँ।

40:26वो किसको देखती है?

40:28वो परमात्मा को देखती है।

40:29कैसा है परमात्मा?

40:30अखंड ज्ञान धन पुरुषाकार है।

40:32ठीक?

40:32अखंड ज्ञान धन पुरुषाकार।

40:38ज्ञान धन पुरुषा पार शरीर कर्म भाव कर्म वसुध पर्याय।

40:42इससे भी ऊँदा ऊँदा माने गहरा।

40:44इससे भी अलग जुदा।

40:47जब तक शरीर दिखता है आत्मा नहीं दिखेगा।

40:54जब तक कर्म दिखते हैं आत्मा नहीं दिखेगा।

40:57जब तक पाप पुण्य के भाव दिखते हैं आत्मा नहीं देखेगा।

41:00जब तक मैं जानने वाली किरण हूँ अवस्था आत्मा नहीं देखेगा।

41:06आत्मा नहीं देखेगा।

41:09उसके पीछे चले जाओ।

41:11ऊंडा, उससे भी ऊंडा।

41:12चैतन्य तत्व, जानने देखने वाला तत्व।

41:15तत्व माने सार।

41:18Concentrate नहीं होता है?

41:21सबका।

41:21मतलब,

41:22लाखों गुलाब के फूल का,

41:26scent निकाले तो एक point होता है।

41:30वो सार।

41:31लाखों गुलाब के फूल में।

41:34लाखों गुलाब के फूल की सुगंध इसमें आ गई एक point में एक बूंद में आ गई।

41:40concentrate जिसको बोलते हैं सार।

41:43रिचोर्ड।

41:44सर्वस्व।

41:46इसको बोलते हैं सार।

41:49जानने देखने वाला तत्व है।

41:51ठीक।

41:51आपका प्रश्न क्या था?

41:56वृद्धि का पुरुषार्थ कैसे होता है?

42:00और ये सब कहा आपने।

42:02ऐसा।

42:03ऐसा चेतन तत्व मैं हूँ।

42:05ये आया।

42:05कार्य करने की पद्धति।

42:08विधि बताना।

42:12ऐसा मैं हूँ। यही मेरा अस्तित्व है।

42:16ये मेरा अस्तित्व है माने सात्त्विक।

42:21कभी नहीं मिटेगा। ये चेतन मैं मिट जाएगा, शरीर मिट जाएगा, आठ कर्म मिट जाएंगे, राग द्वेष के भाव मिट जाएंगे।

42:30मिट जाएगी।

42:32सुख भरा तो है ही एक समय।

42:34आएगी और जाएगी।

42:34लेकिन मैं नहीं कभी मरूँगा, मैं हमेशा रहूँगा।

42:37वो मैं, मैं वो चीज़ हूँ।

42:41जो अखंड है।

42:44जो ज्ञान की मूर्ति है, जो शरीर आकार है, वो मैं हूँ।

42:48यही मेरा अस्तित्व है।

42:49यही मेरा अस्तित्व है माने दूसरा कोई मेरा अस्तित्व नहीं है।

42:55या है तो भी क्षण भंगुर है।

42:57Temporary।

42:58Temporary।

42:59क्या?

43:00शरीर में रहता हूँ, शरीर के साथ संबंध है, लेकिन कैसा संबंध है वो? Temporary।

43:075-50 साल का।

43:098 कर्मों का संबंध है, लेकिन कब तक रहेगा वो? जब तक मैं मोक्ष में नहीं जा पाता।

43:16तब तक रहेगा अंदर में, कर्मण का।

43:18राग द्वेष आदि पुण्य पाप के ढेर सारे भावों का संबंध है, तब तक,

43:22जब तक मैं संपूर्ण विकराग नहीं बनूँगा, तब तक।

43:26एकत्र नहीं बोलूंगा तब तक।

43:27वो भी है।

43:30तो सब क्षणभंगुर।

43:31और आत्मा को देखने वाली अवस्था ज्ञान की।

43:34उसका भी संबंध है।

43:36किसकी अवस्था है?

43:36मेरी है, एक ही है।

43:38लेकिन दूसरे समय में तो वो उपयोगार्थ चले जाता है, मेरी कहां से हुई?

43:43तो उसके साथ भी मेरा संबंध है लेकिन temporary, एक समय मात्र का।

43:49मैं इन चारों में से एक भी नहीं, मैं शरीर में...

43:54में नहीं, ना शरीर में, ना कर्म, ना आदेश के बाद, ना ये किरण, ये जो लहर है वो भी मैं नहीं। मैं कौन? मैं शाश्वत सुदामा हूँ। देखने वाला तत्व हूँ। यही मेरा अस्तित्व है। ये सब चले जाने से मैं मरूँगा नहीं। शरीर छूट जाने से मैं मरूँगा नहीं। कर्म छूट जाने से मैं मरूँगा नहीं। राग द्वेष बिल्कुल zero हो जाएंगे तो मेरा कुछ भी नहीं बिगड़ेगा। अवस्था भी...

44:23अमरता भी मेरे को भले ही चले जाओ मुझे परवाह नहीं है क्योंकि ये मेरा अस्तित्व नहीं है।

44:29केवल ज्ञान की पर्याय भी मेरी नहीं है चले जावे तो चले जावे।

44:32मैं उसके ऊपर dependent नहीं हूँ वो मेरे पर dependent है।

44:37केवल ज्ञान मेरे पे dependent है।

44:40मैं उसके ऊपर dependent नहीं हूँ मैं fixed deposit हूँ और वो interest है।

44:45Interest में से fixed deposit...

44:51Interest में से fixed कोई आती है कि fixed कोई में से interest आता है?

44:56What is the case?

44:58तो मैं fixed कोई हूँ, यही मेरा अस्तित्व है। तो मेरे को तो कोई छू नहीं सकता।

45:02मेरा तो कभी नाश होने वाला नहीं है।

45:04शुद्ध परे का अस्तित्व भी इसमें गौण है।

45:08नहीं है ऐसा नहीं कहा, क्या बोला?

45:12उसका मतलब क्या है?

45:13शरीर तो नहीं है, आठ धर्म तो नहीं है, और भाव...

45:18आठ कर्म तो नहीं और भाव कशाय तो नहीं हो, लेकिन शुद्ध पराय का अस्तित्व इसमें कौन है?

45:22इसका मतलब क्या हो गया?

45:26है तो उसकी ही लेकिन मैं उसकी नजर नहीं करता।

45:30पराय के बिना आत्मा कैसे रहेगा?

45:32पराय के बिना आत्मा रहेगा ही नहीं।

45:35वही है।

45:37देखो राग द्वेष के बिना आत्मा रह सकता है, शरीर के बिना रह सकता है, आठ कर्मों के बिना रह सकता है, शुद्ध पराय के बिना नहीं रह सकता।

45:46पर्याय के बिना नहीं रहता।

45:49लेकिन है तो है क्योंकि fixed deposit में तो ब्याज तो आएगा ही।

45:54लेकिन ब्याज मेरी नज़र में गौण है।

45:58मेरी नज़र में किसकी value है?

46:03Fixed deposit की value।

46:04आया समझ में अब?

46:05शुद्ध पर्याय का अर्थ क्या है?

46:07शुद्ध पर्याय का अर्थ तो है सही।

46:08भले एक समय का है तो सही।

46:10लेकिन मेरे में उसका अर्थ गौण है।

46:14Such a first true faith.

46:18जब ही कही जाती है।

46:19कि ऐसी श्रद्धा के प्रसार के साथ।

46:22उसी वक्त लीनता का प्रथम आत्मा का अनुभव होता है।

46:29ये तो बुद्धि में है।

46:31अनुभव में तो पक्का है।

46:35नहीं तो क्या है ये सब बातें सब क्या है?

46:39बुद्धि की बातें हैं।

46:40ये तो क्या हुआ कि।

46:43ये तो क्या हुआ कि MA BS first class first pass हो गया है लेकिन practice अभी तक की नहीं है।

46:47यही ये जो कहा ना वो practice करके prove करके बताओ।

46:51तो आप सच्चे हो तो आपको आत्मा का अनुभव होगा।

46:56नहीं तो नहीं होगा।

46:57और इसके लिए ये जो सुना तो सही।

47:01जिसको अनुभव हुआ उसने भी सुना जिसको नहीं हुआ वो भी सुना।

47:06लेकिन नहीं हुआ उसको क्या करना है यहाँ तक पहुँचने को।

47:10यहाँ तक पहुँचने को।

47:11पढ़ने में तो आ गया अभी cassette लेके जाओ 10 बार सुनो, understand भी हो जाएगा।

47:18क्या?

47:19मशीन लेकर के रोज दिन भर वही देखो, समझ में तो आ गया कि अनुभव क्या है, आत्मा कैसा है।

47:24बुद्धि में तो बैठ गया।

47:25आप ही नहीं है।

47:28बुद्धि में बैठना अनुभव नहीं है।

47:31Practice से उसको अनुभव में, नीनता का साथ में उसी वक्त नीनता होवे तो ठीक है, समझ में नहीं।

47:36नहीं नहीं आपने जो बोला वैसा...

47:39नहीं नहीं आपने जो बोला वैसा ही आत्मा का स्वरूप है हम हाथ जोड़कर के बोलते हैं।

47:43कोई दूसरा भले ही कुछ भी बोले हम नहीं मानेंगे।

47:46अब तो हमारी सोच सच्ची है कि नहीं है? नहीं बिल्कुल गलत।

47:50जब तक आप स्वयं practice से उसको लीनता में उसी वक्त लीनता में अनुभव नहीं करोगे,

47:54तब तक आपकी श्रद्धा श्रद्धा नहीं है विश्वास हो सकता है लेकिन श्रद्धा नहीं।

48:00श्रद्धा कभी नहीं पलटती है विश्वास पलट जाता है।

48:04यथार्थ श्रद्धा जब...

48:07यथा श्रद्धा जब भी करी जाती है।

48:09जी।

48:09ऐसी श्रद्धा के प्रसार के साथ ही,

48:12लीनता का,

48:14प्रथम आत्मा का अनुभव होता है।

48:17ये ये यहाँ पढ़ो।

48:20अभी आगे का तो बहुत,

48:22और भी गहराई है।

48:24कर लेंगे।

48:26अभी negative।